भगत सिंह, शिवराम हरि राजगुरु, और सुखदेव थापर....!!!
आप तो कभी भूले ही नहीं जा सकते लेकिन हमें उन 6 गद्दारों को भी नहीं भूलना चाहिए जिनकी वजह से आप तीनों हुतात्माओं को फांसी की सजा हुयी थी,
#शोभा_सिंह, #जयगोपाल, #फनीन्द्रनाथ_घोष, #मनमोहन_बनर्जी और #कैलाश_पति...और #हंसराज_वोहरा, जी हाँ ये छः वो गद्दार थे जिनके बयान के बाद ही फांसी की सजा मुक़र्रर हो पाई थी,
इनमे से शोभा सिंह ने बयान दिया था कि उसने अपनी आँखों से देखा था भगत सिंह को असेम्बली में बम ले जाकर फेंकते हुए, लेकिन बाद में बयान बदला और बोला की इसकी खुद की पीठ में दर्द था और यह मालिश करा रहा था तभी भगत सिंह के हाथ से बम छूटकर गिरते देखा था असेम्बली जाने से पहले,इस शख्स को आज़ादी के बाद तत्कालीन भारत सरकार ने राष्ट्रपति भवन के निर्माण का ठेका देकर इसके बयान की कीमत अदा की बाद में इसे न्यू देल्ही म्युनिसिपल कारपोरेशन का पहला भारतीय चेयरमैन भी बनाया गया. अपने बाकी के जीवन में यह कांग्रेस का सिपहसालार बना, जिसे अंग्रेजों ने सर की उपाधि भी दी थी
गौर तलब है कुख्यात पतरकार #खुशवंत_सिंह उसी गद्दार का बेटा है
जयगोपाल, फनीन्द्रनाथ घोष, मनमोहन बनर्जी और कैलाश पति , प्रत्येक को 20000-20000 रूपये अप्प्रुवर बनने के लिए दिए गए थे
अंतिम हंसराज वोहरा जो सबसे चालाक तह उसने कोई पैसा न लेकर लन्दन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में एडमिशन माँगा था जो उसे दिया गया बाद में लन्दन स्कूल ऑफ़ जर्नलिज्म से भी उसने जर्नलिज्म का कोर्स किया और आज़ाद भारत में आकर कई पत्र पत्रिकाओं का अंतर्राष्ट्रीय मुदद्दों का एडिटर बना 1970 के दौरान ये वाशिंगटन में रहा और कई भारतीय समाचार पत्रों का सूचना तंत्र का हिस्सा रहा बाद में 80 के दशक में इसे अपनी गलती का अहसास हुआ और इसने सुखदेव के भाई को एक पत्र लिखा जिसमे सारी जानकारी दी .
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