किसी भी देश की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए मुख्य रूप से चार स्तम्भ होते है जिनमे मीडिया भी एक अहम भूमिका निभाता है,परन्तु भारत की न्याय व्यवस्था,प्रशासन तंत्र,और सरकार की तरह ही मीडिया भी भेदभाव पूर्ण काम करता है...
आज लगभग सभी भारतीय मीडिया हाउस एक कॉर्पोरेट हॉउस की तरह चल रही है और स्टाक एक्सचेंज में लिस्टेड हो चुकी है ... जो नहीं लिस्टेड हैं ...चंदे और अवैध उगाही पर आश्रित हैं.....तो जाहिर है उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात सिर्फ और सिर्फ मुनाफा कमाना हो गया है .. नैतिकता , सच्चाई ,निर्भिकता , और राष्टहित आज भारतीय मीडिया के लिए महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि कैसे ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाया जाये ये महत्वपूर्ण है चाहे इसके लिए पत्रकारिता के सारे सिद्धांत की क़ुरबानी ही क्यों न देनी पड़े ....
इन सभी कुकर्म में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सबसे आगे है...
जो दिखता है वही तो बिकता है....
आज भारत का #मीडिया क्या कर रहा है...
न तो नैतिकता के कोई मायने हैं न ही आदर्श स्थापित करने का मनोभाव व क्षमता रह गयी है...
अगर कुछ इमानदार हैं भी तो कुंठित होकर निष्क्ररिय हो चुके हैं...
यही वो मीडिया है जिन्हे ये नहीं पता भारत का बटवारा आखिरकार क्यूं हुआ था...क्यूं ये देश सोने की चिड़िया से आंक्रताओं का गुलाम हो गया...
जिन्हें आतंकीयों का धर्म आज तक पता नहीं चल पाया...दंगे होने पर धर्म को नही जान पाते...पर जातियां का पता लगाने में देरी नहीं करते...और कहते हैं- आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता....
हद है की आज किस कदर सत्य को झुठलाकर और झूठ को सत्य बनाकर जनता को बेवकूफ़ बनाने का प्रयास कर रही है भारत की मीडिया.....
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