हर किसी के जीवन में कभी न कभी कुछ कठिनाइयों का सामना करना ही पड़ता है लेकिन जो साथी मुसीबतों में भी आपस में एक साथ खड़े रहें तो यही असली इमानदारी है...
रिश्तों का सारा तानाबाना विश्वास पर टिका होता है। मजबूत रिश्ते की पहचान विश्वास से ही की जाती है...
आपसी विश्वास न तो होशियारी से बनता है न समझदारी से....यह केवल व केवल ईमानदारी से बनता है... यह सहजता से विकसित होता है...
एकदूसरे के प्रति सम्मानभाव आपसी विश्वास को बढ़ाता है...अपने आप में विश्वास भी आपसी संबंधों को मजबूती देता है..
अक्सर अपने आसपास मौजूद माहौल में ऐसे सच्चे और ईमानदार लोगों की कमी महसूस होती हैं तो थोड़ी निराशा भी महसूस होती ही है...
दरअसल ईमानदारी और विश्वास एक ही बात है..
इमानदारी व विश्वास हर रिश्ते की जरुरत है...
वह पारिवरिक हो...सामाजिक हो या मित्रवत...
रिश्तों का सबसे बडा़ दुश्मन भौतिकवाद व आत्मकेन्द्रित होना है...
इसलिये...
केवल व केवल इमानदारी से अपनी अक्ल लगाओ...
No comments:
Post a Comment