महाभारत युद्ध के तीन बहुत महत्वपूर्ण नियम थे।
1. एक वीर से एक वीर ही लड़ेगा।
2. निहत्थे पर कोई वार नहीं करेगा।
3. युद्ध समान बल के व्यक्तियों में होगा, मतलब अतिरथी अतिरथी से, महारथी महारथी से, पैदल पैदल से ही युद्ध करेगा।
अभिमन्यु जब चक्रव्यूह भेदकर बीच में पहुँच गए थे तब उनको सारे अतिरथी, महारथियों ने घेर लिया, वे अकेले पूरे झुंड से जूझ रहे थे और वे जब निढाल और निशस्त्र हो गए तब सबने मिलकर उनका वध किया था। अर्थात एक बार में ही कौरवों ने युद्ध के सारे नियम तोड़ दिए थे।
उसके बाद पांडवों ने एक एक करके युद्ध के सारे नियम तोड़े, और जब जब कौरवों ने नियमों की दुहाई दी उन्होंने अभिमन्यु वध का उदाहरण देकर कौरवों का मुँह बंद किया।
अटलजी की सरकार झुंड बनाकर मात्र एक मत से गिराकर कॉंग्रेस ने युद्ध के सारे नियम एक बार में तोड़ दिए थे। अब भाजपा एक एक करके नियम तोड़ रही है और जैसे ही कॉंग्रेसी तिलमिलाते है, अटलजी के साथ हुए अन्याय का हवाला देकर मुँह तोड़ देती है!
किसी भी युद्ध में नियम पहले तोड़ना न तोड़ना आपके हाथ में होता है। खुद जमकर पाप करने के बाद दूसरे पर उँगली उठाना खुद की भद्द पिटवाने समान होता है।
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