Friday, 22 June 2018

" लिंगायत के बारे में "

लिंगायत मत भारतवर्ष के प्राचीनतम सनातन हिन्दू धर्म का एक हिस्सा है...

लिंगायत धर्म गुरू बसवॆष्वर द्वारा 12 वीं सदी में स्तापित एक मत है। लिंगायत मत का उद्देश्य पुरुष महिला असमानता मिटाना, जाति को हटाना, लोगों को शिक्षा प्रदान करना, और हर तरह का बुराई को रोकना हैं।
लिंगायत साहित्य (वचन साहित्य) भगवान का स्पष्ट और वास्ताविक रूप का चित्र्ण प्र्दान करता है। लिंगायत सब अंधविश्वास मान्यताओं को खारिज कर भगवान को उचित आकार "इष्टलिंग" के रूप मे पुजा करने का तरीका प्रदान करता है।
लिंगायत में सभी मानव-जाति जन्म से बराबर हैं। भेदभाव सिर्फ़ ज्ञान पर आधारित है (गुरु शिश्य या भवि भक्त)। यह वर्तमान का शिक्षा प्रणाली के बराबर है। किसी अधिकारी के घर में जन्म लेने से कोई आधिकारि नही बन सकता, अच्छे अंक प्राप्त करके एक अधिकारी बन सकता है। किसी भी मानव इष्टलिंग दीक्षा' संस्कार से लिंगायत बन सकता है।
लिंगायत मे जन्म से पहले हि (जब महिला गर्भवती हो, गर्भावस्था के 7 महीने के आसपास) इष्टलिंग दीक्षा दिया जाएगा। माँ अपने इष्टलिंग के सात अपने बच्चे के इष्टलिंग अपने शरीर पर धारण तथा पूजा  करते है। बच्चे का जन्म होने पर बच्चे को "लिंगधारण" किया जाता है बच्चे की उम्र जब 12-15 साल हो, दीक्षा गुरु द्वारा "इष्टलिंग-दीक्षा" दिया जाता है...
लिंगायत मत अनुभव मंटप में विकसित वैज्ञानिक एवं वैचारिक (ideological) : मत है। अनुभव मंटप की कार्यवाही वचन साहित्य के रूप में दर्ज हैं। अनुभव मंटप के सदस्य आम आदमी हैं वे भले ही आर्थिक रूप से राजनैतिक रूप से गरीब हैं लेकिन वो आध्यात्मिकता मे, जीवन के बारे में, नैतिकत के बारे में अधिक ज्ञानि हैं। वे आध्यात्मिक और सर्वोच्च वास्तविकता का स्पष्ट ज्ञानी थे

आज केवल चुनावी राजनीति के चलते लिंगाययो को देशद्रोही साबित करने का प्रयास किया जा रहा है...

और कितने टुकडे़ करवायागों बे...

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