गुप्तचर अति प्राचीन काल से ही शासन की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता माना जाता रहा है। भारतवर्ष में गुप्तचरों का उल्लेख मनुस्मृति और कौटिल्य के अर्थशास्त्र में मिलता है। कौटिल्य ने अपने अर्थशास्त्र में गुप्तचरों के उपयोग और उनकी श्रेणियों का विशद वर्णन किया है...
जासूसी करना और करवाना हम इंसानों का खुरापाती स्वभाव ही है...
घर में अंदर से लेकर...मुहल्ले..और शहर व देश भी इस विभीषिका से पीड़ित रहें हैं...
हम जैसे बेचारों ने तो केवल करमचंद व व्योमकेश बख्शी को ही देखा..समझा जाना हैं...
आइये कोशिश करते हैं जासूसी की दुनिया में आयाम स्थापित करने वालों के बारे में जानने की कोशिश करके...
Let's move...to chankya era...
आप यकीन नहीं करेंगे लेकिन यह सच है कि चाणक्य के पास अपने जासूसों की एक बड़ी सेना थी, जो चंद्रगुप्त मौर्य की सहायता करती थी। इनका जिक्र स्वयं चाणक्य ने अपनी किताब “अर्थशास्त्र” में किया है...
चाणक्य ने सिकंदर महान से लड़ने के लिए भारत के सभी राज्यों को एकजुट किया था। उन्होंने युवा लड़कियों की एक सेना भी बनाई जिसका नाम था विषकन्या। चाणक्य ने इन लड़कियों को दुश्मन को मारने और चूमने के लिए इस्तेमाल किया क्योंकि इनके चुंबन में जहर होता था।
- चाणक्य ने चंद्रगुप्त मौर्य को भोजन के माध्यम से थोड़ा-थोड़ा जहर दिया, ताकि दुश्मन के जहरीले हमलों का उस पर कोई असर ना हो....
एक दिन चन्द्रगुप्त ने जब रानी के साथ खाना साझा कर लिया (उन्हें आशंका रही होगी...और उन्होने खाना खाने के नाटक ही किया होगा )जो उस समय 9 माह की गर्भवती थीं वह ज़हर से मर गईं...लेकिन चाणक्य ने उसका पेट काटकर बच्चे को बचा लिया...
मेरे ख्याल मां को बचाना तो असंभव रहा होगा...
शायद बच्चे को बचाना संभव रहा हो...
मेरे नजरिया से निर्णय से सव्रथा उचित था...
जो बच जाये उसे बचा लिया जाये...
ये ही बुद्धिमानी थी...
ऐसा ही मेरे गुरूजी ने किया...जो सव्रथा उचित भी था...
चलिये छोड़ते हैं इतिहास को आते हैं वर्तमान पर
आगे जो लिखा गया है...वो
राजस्थान के श्रीगंगानगर ज़िले के रहने वाले कौशिक ने 23 वर्ष की आयु में स्तानक की पढ़ाई करने के बाद ही भारतीय खुफ़िया एजेंसी रॉ में नौकरी शुरू की.
साल 1975 में कौशिक को भारतीय जासूस के तौर पर पाकिस्तान भेजा गया था और उन्हें नबी अहमद शेख़ का नाम दिया गया. पाकिस्तान पहुंच कर कौशिक ने कराची के लॉ कॉलेज में दाखिल लिया और कानून में स्नातक की डिग्री हासिल की.
जाने के पहले उनका खतना भी कराया गया था.
इसके बाद वो पाकिस्तानी सेना में शामिल हो गए और मेजर के रैंक तक पहुंच गए. लेकिन पाकिस्तान सेना को कभी ये अहसास ही नहीं हुआ कि उनके बीच एक भारतीय जासूस काम कर रहा है.
कौशिक को वहां एक पाकिस्तानी लड़की अमानत से प्यार भी हो गया. दोनों ने शादी कर ली और उनकी एक बेटी भी हुई....
कौशिक ने अपनी जिंदगी के 30 साल अपने घर और देश से बाहर गुजारे.
इस दौरान पाकिस्तान के हर कदम पर भारत भारी पड़ता था क्योंकि उसकी सभी योजनाओं की जानकारी कौशिक की ओर से भारतीय अधिकारियों को दे दी जाती थी....
माना जाता है कि सलमान खान की फिल्म 'एक था टाइगर' रवींद्र कौशिक की ज़िंदगी से प्रेरित है.
मुझे अपने भारतीय जासूसों पर गर्व है
जो तमाम कठिनाइयों के बावजूद अपने आप को केवल और केवल देश हित के लिये के लिये सम्रर्पित कर दिया...
लाखों नमन हैं ऐसे विरोध पर...
काश मेरी जवानी में कोई तो एक मौका तो देता इस मात्रभूमि का कर्ज उतारने को.....
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