चित्रगुप्त - कहाँ पैदा होना चाहते हो ?
आत्माराम - एम. पी. या छ. ग. की रानी भिखारन के पेट में डाल दीजिए महाराज ।
चित्रगुप्त - भई टाटा अम्बानी अडानी लायक तो तुम्हारी औकात नहीं ये ठीक पर .. कोई मिडल क्लास चुन लेते ।
आत्माराम - पागल हूँ क्या ?
बाप उधार लेकर अस्पताल का बिल चुकाकर पैदा करे ..
पाई पाई जोड़कर पढ़ाये ..
जिस जाति धर्म में पैदा हुए उसके हिसाब से पढ़ो लड़ो .. कम्पटीशन करो .. नौकरी खोजते 35 के हो जाओ तब भी शादी नहीं न ठिकाना .. ऊपर से ये टैक्स .. वो टैक्स ।
डालिये रानी भिखारन के पेट में .. तीन झुग्गियां तो तनी ही थी .. अगले महीने सरकारी घर भी मिलने वाला है ।
पेट में आते ही पूरे 9 महीने सरकारी डॉक्टर खुद घर आकर देखेंगे ( हिरण्यगर्भा योजना )
पैदा 9000 लेकर होऊंगा ( जननी योजना )
पैदा होते ही पालने को मामा है ही .. और पढ़ाने लिखाने भी .. भले ही अपन न पढ़ें ( कितनी योजनाएं बताऊं )
फिर अपन को भी एक सरकारी फ्लैट जिसे किराए पर उठाकर नई झुग्गी तान लो .. फिर ये भत्ता .. वो भत्ता .. मुफ्त सिलेंडर .. रुपये किलो चावल दाल .. 2 दिन काम करो और सोम की दारू पीकर पांच दिन गरराओ ..
फिर बस इक्कीस का होना है मामा शादी कर देगा जिसके लिए छोरी मास्टर खोजकर देंगे और शादी का पूरा खर्च मामा देगा कन्यादान करके ( मुख्यमंत्री कन्यादान योजना ) ..
बस करना क्या है फिर .. जुट जाना है .. एक और अपन सा भेज देना हरामखोर जो इन सबके बदले बस एक बटन दबा दे ।
( बस छोरी न बनाना महाराज .. क्यों ? ये तो आपको पता ही है .. वैसे भी इतना पापी तो मैं हूँ नहीं जो छोरी बनाएं आप )
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चित्रगुप्त कोमा में .. इलाज जारी ।
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कम लिखा .. ज्यादा पढ़ना जी ( पुराने जमाने की चिट्ठी की पंक्ति )
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