हमने पिछले सालों में जो कुछ किया वो आनेवाली पीढ़ी के लिए चुटकुला होगा.
वो हंसेंगे कि कैसे हमने एक हज़ार के नोटों से फैल रहे भ्रष्टाचार को खत्म करने के नाम पर दो हज़ार का नोट जारी कर दिया था.
वो हंसेंगे कि कैसे हमने सरकार की असफलता को मिलकर दबाने के लिए मान लिया था कि असली नोट रंग छोड़ता है.
वो हम पर इसलिए भी हंसेंगे क्योंकि हमने एफडीआई, जीएसटी, आधार को नकारनेवालों को पूरे जोश में चुना और फिर जब उन्होंने भी यही लागू किया तो अचानक हम भी इनके फायदों को साबित करने लगे.
उन्हें हंसी आएगी कि हम ही थे जिन्होंने योगी, साक्षी, बिप्लब जैसों को एक ही वक्त पर चुना और नेता माना.
उनको हैरत से हंसी छूटेगी कि विज्ञान से चमकती बीसवीं सदी के अंत के बाद हमने ऐसे लोगों को देश सौंपा जो गणेश की सर्जरी, महाभारत में इंटरनेट और पुष्पक की थ्योरी बाकायदा सिलेबस में डालने पर आमादा थे.
वो हंसेंगे और उस दिन हमें भी अहसास होगा कि हां यार वाकई बेवकूफी तो हुई थी.
मतलबी दुनिया को बयां करना , इन जज्बातों की तौहीन है , दिल पर अश्क है जाया >> फिर भी एक कोशिश है लोगों को मनाने की ?
Sunday, 24 June 2018
आपबीती - बी.जे.पी
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