अऊर ऊ "मक डोनलवा" पहिले ढाबा खोले रहा का...ढाबा पर बर्तन में बहुत भिस्साहिन महकत रही तो मालिक कहिन कि अगर कउनो गिराहक सिकाइत करे तो हम बोलब की..."मक डो नल" मने (अबे मा*# कूकुर बर्तन धोई ले नल पर) तो तुम लोग समझ जाना...बस फिर क्या था...चालू हो गया मकडोनल...
मतलबी दुनिया को बयां करना , इन जज्बातों की तौहीन है , दिल पर अश्क है जाया >> फिर भी एक कोशिश है लोगों को मनाने की ?
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डर...
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