बाबा भारती के पास कुल जमा संपत्ति में बस एक घोड़ा था, घोड़े में बाबा की जान बसती थी। वह घोड़ा था भी हजारों में एक, उस घोड़े पर इलाके के मशहूर डाकू खड़ग सिंह का मन आ गया था।
खड़ग सिंह ने घोड़े को पाने के लिए तमाम जोर-जबरदस्ती, दंद-फंद कर लिया पर घोड़े को हासिल ना कर सका..
एक दिन बाबा भारती घोड़े से कहीं जा रहे थे, एक #फकीर ने उन्हें आवाज दी और थका होने का हवाला देकर थोड़ी दूर घोड़े पर ले जाने की विनती की, बाबा ने फकीर को घोड़े पर बिठाया, फकीर ने घोड़ा दौड़ा लिया..
बाबा चिल्ला के बोले, "घोड़ा ले जा रहे हो ले जाओ खड़ग सिंह पर फकीर बनकर घोड़ा नहीं लूटना चाहिए था!
ऐसे तो लोग फकीर पर भी विश्वास करना छोड़ देंगे.!
खड़ग सिंह बोला पागल हूं जो फकीर बनकर नहीं लूटूं, हर जगह गोली चलाकर राहजनी करना कहां की बुद्धिमानी है ??
आगे भी खड़ग सिंह जब कोई लूट और तरीके से नहीं कर पाता, तो फकीर बन जाता..
घोड़ा गंवाने वाले बाबा भारती ने बताया कि खड़ग सिंह इधर किसी बड़े राज्य का राजा बन चुका है, पर फकीर वाली ट्रिक उसने अब तक नहीं छोड़ी है।
नोट: - मंदबुद्धि ध्यान दें, यह पूर्णतया गैरराजनीतिक पोस्ट है। फकीर के चरित्र का मोदीजी मिलना महज़ इत्तफ़ाक़ है।
धन्यवाद 🙏
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