बाहर रहने वाली लड़कियों के रूम में मौजूद एक टेडी, बढ़िया से रंग का फोल्डिंग,एक से बढ़कर एक कंपनी की क्रीम और ढेर सारे कपड़े चीख चीखकर वहां किसी लड़की के रहने की गवाही देते है। जबकि बात लड़को की करे तो फोल्डिंग वोल्ड़िंग के खर्चे से लड़के यूँ तो बचने से भरसक प्रयास करते है पर अगर कोई कानपुर साइड का हुआ तो भौकाल (रुतबा) टाइट करने के फेर में फोल्डिंग ले आएगा वरना अधिकतर लौंडे ज़मीन पर ही गद्दे डालकर सोने में यकीन रखते है। टेडीबीयर जैसे बिना मतलब के ढकोसलों के लिए तो लड़को के पास बिल्कुल पैसा नही होता पर हां बिहार साइड के लोग क्रीम पर ज़रूर खर्चा करते है बाकी फैले हुए बर्तन,गंदगी और इधर उधर पड़े हुए कपड़े ही एक कमरे को "लड़के का रूम" होने की पहचान दिलाते है।
मतलबी दुनिया को बयां करना , इन जज्बातों की तौहीन है , दिल पर अश्क है जाया >> फिर भी एक कोशिश है लोगों को मनाने की ?
Tuesday, 21 August 2018
लॉजिकल बातें 😊
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