किसी बड़े नेता की रैली में पहुंचना हो तो पुलिस से लेकर कार्यकर्ता आपके सफर को आसान और मंगलमय बनाने में कोई खोर कसर नहीं छोड़ेंगे। आपको मिनीमम 1 से डेढ घंटे तो उनका इंतजार करना ही होता है और फिर जबतक वो बोले बैठना है। इस दौरान उठने की कोशिश भी की तो पुलिस वाले तुरंत बिठा देंगे।
दूसरी तस्वीर नामी मंदिर की। भगवान की मूर्ती तक पहुंचना किसी जंग से कम नहीं होता। दर्शन के लिए प्रभु के सामने खड़े भी नहीं हुए कि पुलिस आगे बढा देगी। 10 सेकंड भी मिल जाए तो गनीमत है।
मतलब ये कि सारी ताकतें चाहती है कि इंसानों को ही पूजो और उसी पर आस्था रखो...
मतलबी दुनिया को बयां करना , इन जज्बातों की तौहीन है , दिल पर अश्क है जाया >> फिर भी एक कोशिश है लोगों को मनाने की ?
Tuesday, 21 August 2018
तस्वीरे ?
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डर...
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