मतलबी दुनिया को बयां करना , इन जज्बातों की तौहीन है , दिल पर अश्क है जाया >> फिर भी एक कोशिश है लोगों को मनाने की ?
Monday, 5 December 2016
अतुल्य भारत
बचपन में हमें पढ़ाया जाता था कि योरप के देश धनवान हैं | वहाँ की जलवायु ठंडी है इसलिए वहाँ के मजदूर अधिक काम कर सकते हैं |
भारत एक गरीब देश है क्योंकि इसकी जलवायु गरम है इसलिए यहाँ के मजदूर अधिक काम नहीं कर सकते |हम क्या कर सकते थे ? हमें वही पढ़ना और अध्यापकों को वही पढ़ाना पड़ता था जो सरकार की पुस्तकों में निर्धारित होता था लेकिन पता नहीं, हमारा मन क्यों नहीं मानता था | वह देश जो गरम जलवायु के बावज़ूद एक हजार वर्षों तक विदेशी शासनों का बोझ उठा सकता है, जिसके सैनिक दुनिया में अंग्रेजों का शासन कायम रखने के लिए प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध में दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेनाओं से लोहा ले सकते हैं, जहाँ के किसान फीजी, सूरीनाम, मारीशस, गुयाना, त्रिनिदाद जैसे देशों में जाकर वहाँ की ज़मीन को उपजाऊ बनाकर अपने विदेशी मालिकों के लिए 'सफ़ेद सोना' (चीनी) के लिए गन्ना उगा सकते हैं वे गोरे श्रमिकों से कमतर या काहिल कैसे हो सकते हैं ? लेकिन क्या किया जाए |भाषा, धर्म,सभ्यता और संस्कृति के बारे में भी ऐसी ही बहुत सी बातें योजनाबद्ध तरीके से लोगों के मन में बैठाई गई थीं |रंग रूप के बारे में भी हमारे मन में यह बैठा दिया गया था कि गोरे लोग ही सुन्दर होते हैं जिसके कारण आज देश में गोरा बनाने वाली क्रीमों का हजारों करोड़ का व्यापार फैला हुआ है |
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