तलाशिये ऐसे लोगों को -------
## जो मध्य उम्र के हों और उनके अन्दर भगवान या अल्लाह की सोच किसी न किसी रूप में हो .........
## जो भगवान या अल्लाह के नाम पर सिकुड़ न जाते हों .......
## जो भगवान या अल्लाह से डरते न हों ......
## जो भगवान या अल्लाह को अपनें साथ - साथ साकार रूप में रखना चाहते हों .....
## जो भगवान या अल्लाह को अपनी ढाल न बना कर रखना चाहते हों .....
## जो भगवान या अल्लाह से वह सब न चाहते हों जो उनके लिए असंभव लग रहा हो ......
लोग भगवान या अल्लाह को क्यों चाहते हैं ?
** क्यों की भगवान या अल्लाह कुछ कहता नहीं ------
** क्योंकि भगवान या अल्लाह तर्क - वितर्क नहीं करता ------
** क्योंकि भगवान या अल्लाह कुछ फूल , कुछ अक्षत [ चावल ] , सड़ा-गला फल से खुश हो कर वह देता है ,
जो .....
[क] लगभग असंभव होता है .....
[ख] जो किस्मत बदल देता है ....
[ग] जो पुत्र - धन देता है .....
[घ] जो अति सुन्दर नारी देता है ....
[च] जो सुख , सम्पति देता है .....
भला ऐसे को कोई क्यों नहीं चाहेगा
जो -----
तन , मन , सुबुद्धि , धन - दौलत , पुत्र , नारी और मरनें के बाद स्वर्ग , जहां के भोग के लिए देवता
भी तरसते हैं .......
जिसकी मांग शून्य हो ......
अब आप सोचिये =======
जब मन - बुद्धि में इतना कूड़ा - करकट भरा है
तो क्या ....
हमभगवान या अल्लाह को हासिल कर सकते हैं ?
भाई ! कहाँ चले , परमात्मा को तलाशनें -ज़रा -------
अपनें अन्दर झाँक कर देखना , कहीं वह .......

No comments:
Post a Comment